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दूध और क़त्लखाने

Disclaimer:  इस लेख का हर धर्म विशेष से लेना देना है, क्योंकि जानवरों की हत्या सब ने मिल कर की है; और जिसने नहीं की, उसकी मृगतृष्णा से, उसे भली भांति परिचित कराया जाएगा। वैसे दिल पर लेने की सख़्त ज़रूरत है, होगा तो कुछ नहीं, जैसा अब तक होता चला आ रहा है; पर क्या पता हृदय परिवर्तन हो जाए; आख़िर सिद्घार्ध भी मृत्यु की ही बात पर बुद्ध हो गए थे। इसी उम्मीद के साथ मैं भी अपना लेख प्रारंभ करता हूं । दूध: हल्दी वाला औषधि, शिलाजीत वाला ताकतवर, केसर वाला गरम, नींबू वाला पनीर, खटास वाला दही और बोर्नविटा वाला रिंकू पिंकू का प्रिय। जय हो दूध, और उसकी महिमा। पर कभी सोचा, यह जो सुबह सुबह वेरका, अमूल, मदर डेयरी, आदि के बूथों पर लाइन पर लग जाते हो; कभी सोचा है कि जितनी सरलता से दूध मिलता है, उतनी ही मुश्किल आन पड़ती है, उन पशुओं के जीवन पर जो हमारी इस दूध की तृष्णा के कारण जन्म लेते हैं। जी हां, मनुष्यों की तरह जानवरों में भी गर्भधारण करने के उपरांत ही दूध आता है। मैं जानता हूं, आपके मन में यह प्रश्न उत्पन्न हो चुका होगा; गर्भधारण करने से तो जीवन की उत्पत्ति होती है, तो मैं काहे मृत्यु...

शादी: महिला अत्याचार की सच्ची कहानी।

  Disclaimer: मेरा लेख का किसी धर्म , जाति और संप्रदाय से कोई लेना देना नहीं है क्योंकि जिसको भी या जिस भी धर्म , जाति और संप्रदाय को जब भी मौका मिला है उसने महिलाओं के शोषण की कोई कसर नहीं छोड़ी है। क्यों और कैसे वह आप आगे स्वयं पढ़ेंगे भी और जानेंगे भी वैसे यदि कोई उदाहरण याद आया हो तो पास रखना और कोशिश करना कि आप कभी भी किसी स्त्री पर उसे व्यवहारिक रूप से सजीव न करें। पर हां इस लेख का संबंध हर एक जीवित और मृत व्याहता से है जिसने एक दो या जितनी भी बार व्याह किया हो ( आख़िर उसकी मर्ज़ी की भी कोई कदर करो)। शादी व्याह , यूं तो बहुत किस्म के हैं पर हम यहां आज के चलन के अनुसार मैं दो किस्म के विवाह की ही बात करूंगा । १. Love Marriage/ प्रेम विवाह २. Arrange Marriage/ व्यवस्था विवाह युवाओं को तवज्जो देते हुए पहले हम प्रेम विवाह / love marriage की बात करेंगे जिसमें आज कल न प्रेम है और न love । Every love affair is a failure, without exception~ osho मैंने ओशो को quote इसीलिए किया ताकि मैं यह कह सकूं कि मैं उनके इस विचार से सहमत नहीं हूं क्योंकि अब इस विचार पर ...

मुक्ति बंधन

(श्री कृष्ण-अर्जुन संवाद पर रचित) श्री कृष्ण अर्जुन से: रुकना झुकना तेरा काम नहीं, तू पथिक तुझ से पथ, पथ से तेरा नाम नहीं, हाथों में लिए अभिलाषादीप निरंतर प्रगति करता, डरता न बुराई से बस दामन दमन से तू डरता, चाहे स्वेद की धार बहे, चाहे रक्त की बौछार बहे, मगर पीछे न हट, कर आत्म संकल्प न छोड़ेगा तू यह हठ, जीवन की गगरी में चाहे जीवन हो दो बूंद क्या है ? भीतर तेरे सागर बसता यह दो बूंद दो बूंद क्या है ? तीन पग में माप ले तू सारी धरातल, नीलकंठ भांति पी जा कालकूट से भरा हलाहल, कर्तव्य के गांडीव से जो विपदा बाण चलें हैं, हिमालय की शीतलता, अग्नि के तेज को सहते-सहते सदा वीर चले हैं, नियति ने प्रशस्त किया है मार्ग पर अग्रसर होना है, यही हल था धनंजय यही हल होना है।। अर्जुन श्रीकृष्ण से: आंख में अश्रु, मुख पर मौन लिए खड़ा है अर्जुन, बंध मोह पाश में हार पड़ा है अर्जुन, श्री कृष्ण अर्जुन से : भूल गया तू पौत्र भीष्म का, जिसकी प्रतिज्ञा न जग में दूजी तुझमें गौत्र उस भीष्म का, सामने शकुनि दुर्योधन या हो सूत पुत्र, न हार मान रे पांडु पुत्र, कर्म कर फल से तेरा काम नहीं, र...