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प्रेम: सेक्स और प्रभुत्व के अलावा क्या?

Disclaimer:  14 Feb नजदीक है तो सोचा जिन्होंने मुझसे प्रेम करने का अधिकार छीना उनकी थोड़ी खटिया खड़ी की जाए। मित्रों याद रहे: यदि लेख पसंद आए तो इतना शेयर करिए, इतना शेयर करिए कि वाद, विवाद, और वायरल सब हो जाए। वैसे तो चौथा ब भी है पर वह व नहीं ब है: बकैती, जो मुझे नहीं पर आपको मेरे लेखों पर कमेंट करके करनी होती है जो आप नहीं करते हैं, इससे मेरा दिल बड़ा आहत है। तो मेरे गहन चिंतन की शुरुआत मैं ओशो को कोट करके करूंगा कि "Every love affair is a failure, without exception" यानि हर प्रेम संबंध बिना अपवाद के असफल ही होता है। और यदि मैं इसको अपनी भाषा में थोड़ा अलंकृत कर के बोलूं तो कह सकता हूं कि जब प्रेम का मक्खन छोलोगे तो सबके हिस्से केवल छाछ आएगी कुछ विरले ही लोग होंगे जिनको मक्खन का स्वाद चखने को मिलेगा। मैंने भी कोशिश की इस मक्खन को चखने की पर मुझे लगता है कि नसीब में मेरे भी छाछ ही आई है। कारण कुछ भी रहे हो, कि कामुकता की मधानी से मक्खन छोला या मलाई रूपी प्रेम जो सब की मलाई की तरह पुराना बासी था पर परिणामरूप में तो केवल कड़वा घूंट लस्सी का ही मिला है । पर यदि आप में थोड़ी बह...